आज जिवन मे आई एक और सुहानी घडी..
२६ साल पुरे हुये उम्र २७ कि ओर बढी..
खैर छोडो..इस बढती उम्र कि अपनी परेशानी है..
काले झुल्फो के बीच छिपे २ सफेद बालो कि अपनी कहानी है..
जिसे स्कूल मे चाहा था ..
उसके बच्चे मुझे आजकल मामा कहते है..
ना जाने मेरे हम उम्र दोस्त ये सब कैसे सहते है!!
दादी शादी कराने के पीछे है पडी..
पापा को चाहिये १ साल के अंदर एक पोता या पोती..
उम्मीद कि भी यारो कोई हद्द है होती!!
फिर सोचता हुः ,
यह तो सफर का एक छोटा सा मोड है..
हर समस्या का कहिन ना कहिन छिपा
कोई ना कोई तोड है!!
अभी तो सामने पुरी जिंदगी है पडी ..
ईसी कडी से जुडी है आने वाले कडी..
जिस कडी का इंतेजार है..वोह कही दूर है खडी..
उसी के लिये आज ये कविता है जडी!!
२६ साल पुरे हुये उम्र २७ कि ओर बढी..
खैर छोडो..इस बढती उम्र कि अपनी परेशानी है..
काले झुल्फो के बीच छिपे २ सफेद बालो कि अपनी कहानी है..
जिसे स्कूल मे चाहा था ..
उसके बच्चे मुझे आजकल मामा कहते है..
ना जाने मेरे हम उम्र दोस्त ये सब कैसे सहते है!!
दादी शादी कराने के पीछे है पडी..
पापा को चाहिये १ साल के अंदर एक पोता या पोती..
उम्मीद कि भी यारो कोई हद्द है होती!!
फिर सोचता हुः ,
यह तो सफर का एक छोटा सा मोड है..
हर समस्या का कहिन ना कहिन छिपा
कोई ना कोई तोड है!!
अभी तो सामने पुरी जिंदगी है पडी ..
ईसी कडी से जुडी है आने वाले कडी..
जिस कडी का इंतेजार है..वोह कही दूर है खडी..
उसी के लिये आज ये कविता है जडी!!
आज भी हम यही दुआ करते है, जिंदगी जो अनदेखी कडी, जल्द हि तुमसे आके जुड़े.
ReplyDeleteबहुत अच्छे. ऐसेही लिखते रहिये :)
nice poems bhaiya... like the lyrical beauty in them. Keep writing :)
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