चारो तरफ था फैला अंधकार
उसमे वह उषा की किरण धुंड रहा था
इंसान जो ठेहरा... आदतन झुटे ख्वाब बून रहा था !!!
मां रो रही थी... छोटी बिलख रही थी
वोः फिर भी नन्हे को हसाने कि कोशिश कर रहा था
खून के आंसू रो चुका है ...सुख-चैन सब खो चुका है
फिर भी 'उनसे' अमन कि उम्मीद रख रहा है....
इंसान जो ठेहरा... आदतन झुटे ख्वाब बून रहा है !!!
उसमे वह उषा की किरण धुंड रहा था
इंसान जो ठेहरा... आदतन झुटे ख्वाब बून रहा था !!!
हर ओर लाशो का ढेर लगा था
वोः भीड में बेबस सा अपनो को धुंड रहा था...इंसान जो ठेहरा... आदतन झुटे ख्वाब बून रहा था !!!
वोः फिर भी नन्हे को हसाने कि कोशिश कर रहा था
इंसान जो ठेहरा... आदतन झुटे ख्वाब बून रहा था !!!
फिर भी 'उनसे' अमन कि उम्मीद रख रहा है....
इंसान जो ठेहरा... आदतन झुटे ख्वाब बून रहा है !!!
No comments:
Post a Comment