Friday, 9 September 2011

'झुटे ख्वाब' : by me dedicated to Mumbai blast victims

चारो तरफ था फैला अंधकार
उसमे वह उषा की किरण धुंड रहा था
इंसान जो ठेहरा... आदतन झुटे ख्वाब बून रहा था !!!

हर ओर लाशो का ढेर लगा था
वोः भीड में बेबस सा अपनो को धुंड रहा था...
इंसान जो ठेहरा... आदतन झुटे ख्वाब बून रहा था !!!

मां रो रही थी... छोटी बिलख रही थी
वोः फिर भी नन्हे को हसाने कि कोशिश कर रहा था
इंसान जो ठेहरा... आदतन झुटे ख्वाब बून रहा था !!!

खून के आंसू रो चुका है ...सुख-चैन सब खो चुका है
फिर भी 'उनसे' अमन कि उम्मीद रख रहा है....
इंसान जो ठेहरा... आदतन झुटे ख्वाब बून रहा है !!!

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